Friday, July 11, 2008

कितने दिन और बचें है.......

कितने दिन और बचें है जिंदगी में मेरे ,
मैं करके बैठा हूँ हिसाब दिल्लगी में मेरे॥

मैं हूँ एक शर्त ,लगावो हार भी जावो अगर,
मुझको ना होगा कोई गम है सादगी में मेरे ॥

वो आयेंगे ,ना आयेंगे इसी तलातुम में हूँ ,
देखता हूँ क्या असर है बंदगी में मेरे ॥

टुकडो टुकडो से बनाई थी एक तस्वीर "अर्श" ने ,
वो आशना भी दूर खड़ा है अजनबी में मेरे ॥

प्रकाश"अर्श"
२४/०५/2008

2 comments:

  1. really nice one....I hope among all..

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  2. टुकडो टुकडो से बनाई थी एक तस्वीर "अर्श" ने ,
    वो आशना भी दूर खड़ा है अजनबी में मेरे ॥
    शानदार रचना जानदार अभिवयक्ति

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