Sunday, November 16, 2008

हाजीरी लगाई मैंने फ़िर इकरार कर लिया ..

उनसे नज़र हमने, इस तरह मिला लिया ।
हाय अल्लाह क्या कर दिया, ये क्या कर लिया ॥

आई जो बात ,अपनी मोहब्बत की अस्हाब ,
उसने ना कोई दिल लिया, न कोई जिगर लिया ॥

देखा था, इस अंदाज़ से उसने मेरी तरफ़ ,
रहमत खुदाया तेरा था के तीरे-जिगर लिया ॥

लोगों ने पूछा जब ,मुन्सफी में उसका नाम ,
आशुफ्ता खुदा का नाम हमने उधर लिया ॥

रोका जब उस तरफ़ से, रास्तों ने मेरा हाथ ,
हाजीरी लगाई मैंने, फ़िर इकरार कर लिया ॥

मुझको भी अब बता दो दीवानों के अस्मशान ,
ख़ुद ही कब्र खोद लिया" अर्श" ख़ुद ही गुजर लिया ॥


प्रकाश "अर्श"
१६/११/२००८
अस्हाब =स्वामी ,मालिक,
आशुफ्ता =घबराहट में ,

19 comments:

  1. bahut khoob...vah !!!
    Thanks for ur comments on my ghazal too...

    http://pramodkumarkush.blogspot.com

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  2. लाजवाब, खासकर आखि‍री शेर।

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  3. waah bahut khub sahi hai aakhari sher bahut khubsurat bana hai

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  4. fifth and last sher bahut achcha hai.....achchee ghazal likhi hai Arsh...

    [saath mein meaning bhi diye hain,ya bhi bahut theek kiya.].

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  5. " very nice gazal to read, great work.."

    Regards

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  6. बहुत खूब कहा आपने खास कर आखिरी शेर

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  7. bahut badhiya gajal vaah bhai badhai.

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  8. आप मुझे तूफ़ानों की याद दिला रहे हैं, मज़ा आ गया कठिन ग़ज़लों का लुत्फ़ और दुनिया चाहे कुछ कहे!

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  9. आप सभी पाठकों का मैं तो बहोत बहोत रिणी हूँ जो आपलोगों ने मेरे लिए वक्त निकला.. विनय जी मैं आपकी बात कुछ समाज नहीं पाया कृपया बिस्तार से कहें ...
    मैं तो सिर्फ अपना करमा कर रहा हूँ बस आप सबों का स्नेह बना रहे ....

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  10. This comment has been removed by the author.

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  11. धड़कनें तेज़ हो जायें थीं देखकर उन्हें,
    हम फिर किस तूफ़ाँ का इंतिज़ार करते।


    और कुछ शेष रह गया समझाने को!!!

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  12. bahot khub vinay ji thnx for this...

    regards
    arsh

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  13. क्या बात है बंधुवर... बेहतरीन.. साधुवाद..

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  14. इंतज़ार के इकरार की हाजरी लगाने मै भी चला आया हूँ

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  15. wah kya sayri hai

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  16. ritesh bhai is taraf dhyan dilane ka shukriya ,muje pata hai ke misra ula aur misra sani me kafiya alag hai magar fir maine ghazal ke dusare sher ke misra sani me kafiye ko milaya hai... kuch khas ghazalkar kahte hai ke agar istarah se bhi ghazal kaha jata hai to wo galat nahi hai... iske liye aapka bahot abhari hun....

    regards
    arsh

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  17. अच्छे भाव हैं ग़ज़ल में प्यारे "अर्श" भाई. संभावनाओं को तलाश कर लिखते चलिए.

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आपका प्रोत्साहन प्रेरणास्त्रोत की तरह है,और ये रचना पसंद आई तो खूब बिलेलान होकर दाद दें...... धन्यवाद ...