Saturday, February 28, 2009

अदब से मौत का भी सामना करे कोई ...

गुरु देव पंकज सुबीर जी के आशीर्वाद से तैयार ये ग़ज़ल आप सभी
के सामने है ... आप सभी के प्यार औरआशीर्वाद का आकांक्षी हूँ ....



ये मुख्‍़तसर सी जि़ंदगी है क्‍या करे कोई
है सांस आखिरी बची दुआ करे कोई ॥

घुटन है जिन्‍दगी ये फिर भी जी रहा हूं मैं
क्‍युं आखिरी में बात बेमजा करे कोई ॥

मिले हैं मौत से तो झूम कर के हम गले
बला से अपने जिन्‍दगी कहा करे कोई ॥

यकीन है वो आयेगा जरूर लौट कर ।
उसीके इन्‍तजार में जिया करे कोई ॥

कला तो सीखते हैं जिन्‍दगी की सब यहां ।
अदब से मौत का भी सामना करे कोई ॥

किसे रहे थे अर्श ढूंढ ख्‍वाब में भला ।
ये नींद टूटने पे क्‍या पता करे कोई ॥

प्रकाश'अर्श'
२९/०२/२००९


23 comments:

  1. अदब से मौत का सामना .
    क्या बात है लाजबाब

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  2. bahut hi achhi gazal hai.
    second line or last third line sabse achhi lagi.
    :)

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  3. kala to seekhte hain........................

    bahut sunder rachna, sabhi sher daad ke kabil. mubarak.

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  4. शुक्रिया अर्श भाई बहुत दिनों बाद नज़र आए लेकिन आपने पिछले दिनों की सारी कसर निकाल दी। बहुत ख़ूबसूरती से कही गई ग़ज़ल

    "कला तो सीखते हैं ज़िन्दगी की सब यहाँ
    अदब से मौत का भी सामना करे कोई।"


    भाई अर्श आपका फिर से एक बार कायल हुआ

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  5. बहुत ही सुंदर कविता, हर शव्द निखरा हुआ सा.
    धन्यवाद

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  6. कई दिनों तक आ नहीं पाया, माफ़ कीजियेगा|
    "क्यूँ आखिरी में बात बेमजा करे कोई" बहुत उम्दा|
    हरेक शेर गौर करने लायक है|

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  7. lajawab...........har sher bahut sundar hai.........dil ko chuta hua.

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  8. 'कला तो सीखते हैं...अदब से मौत का ....'

    वाह! बहुत खूब!
    बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल लिखी है अर्श आप ने.

    [post a comment box mein jo message likha hai us mein prerna strot mein spelling correct kar len. 'strot 'honi chaheey--yahan 'shrot' dikh raha hai. :)]

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  9. कला तो सीखते हैं जिन्दगी की सब यहां,
    अदब से मौत का भी सामना करे कोई।

    बहुत खूब अर्श जी वाह-वाह बढ़िया है...।

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  10. एक अच्‍छी ग़ज़ल के लिये बधाई

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  11. Really good....
    der aaye magar durust aaye...mazaa aa gyaa..padh kar ...congratulations.

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  12. एक और सुन्दर गजल के लिए साधुवाद.

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  13. बहुत अच्छे अर्श जी
    क्या खूब ग़ज़ल है, गुरु जी ने तो इसमें और चार चाँद लगा दिए हैं.
    lajawaab

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  14. जब खुद गुरू जी ने तारीफ़ कर दी है अर्श जी,तो हमारी बिसात क्या...जलन हो रही है आपसे। हमारी गज़लों को कभी बधाई नहीं मिलती है गुरू जी से....
    सारे शेर लाजवाब और ये "मिले हैं मौत से गले.." वाला अंदाज़ तो जबरदस्त है

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  15. आप सभी पाठकों और ब्लागेर बन्धुवों को मेरा नमन के आपका प्यार और आशीर्वाद मुझे mila इस रिसेशन के वक्त भी ....बात सही कही है आपने गौतम जी मेरे ब्लॉग पे आज गुरु जी मेरे प्रभु आये इससे बढ़कर मेरे लिए और कुछ हो ही नहीं सकता है ...मेरे तो जीवन सफल हो गए...मगर जलन वाली kya बात् है भाई जी आप तो खुद ही बिशिष्ट हो ... और आप पे भी गुरु जीका तो आशीर्वाद बना हुआ ही है .... आप उनके सबसे प्रिय शिष्यों मेसे एक हो... मैं तो एक्लाब्या ठहरा...मेरी kya मजाल ....

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  17. यार ग़ज़ल तो बहुत सुन्दर बन पड़ी है, बधाई के पात्र हो!

    ---
    चाँद, बादल और शाम
    गुलाबी कोंपलें

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  18. Wah Arsh ji aapki gazal padhi

    ek ek sher par dil wah kar utha

    kamaal ke sher kahe hain

    bahut bahut badhayi apako

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  19. अर्श भाई बहुत ही सुन्दर गजल
    अदब से मौत का सामना -- वाह क्या बात कही है
    हर बार की तरह अतिउत्तम

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  20. ... प्रभावशाली गजल!!!

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  21. "अदब से मौत का भी सामना करे कोई ......"
    वाह हुज़ूर !
    ख़याल की उम्दा उड़ान और लहजे में ऐसी सच्चाई .......
    इससे कहते हैं गुरु-जन की दुआओं का असर , मुबारकबाद कुबूल करें .. .. . .
    ---मुफलिस---

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