Thursday, January 15, 2009

ख़ुद को पत्थर बना लिया यारों ...

बहरे खफीफ ..............................................आशीर्वाद
२१२२-१२१२-२२....................................गुरु देव पंकज सुबीर जी

मैंने भी दिल लगा लिया यारों।
जख्म पे जख्म पा लिया यारों ॥

मौज फ़िर ज़िन्दगी नही देती ।
जख्म गहरा जो ना लिया यारों ॥

आज ना डगमगा के चल पाया ।
वादा बादे पे था लिया यारों ॥

हादसे और हो गए होते ।
ख़ुद को पत्थर बना लिया यारों ॥

दफ्न कर 'अर्श'लौट जाओ तुम।
रूह तो और जा लिया यारों ॥

प्रकाश'अर्श'
१५/०१/२००९
बादे=शराब ,जा=जगह ।

56 comments:

  1. जैसा कि मैंने पिछली बार लिखा था, आपके सभी ग़ज़लों में दोनों बातें है. एक तो उसका उन्वान, मायना या शैली माशाल्लहा बेहद साफ़सुथरी, मोहक और बिना क्लिष्टता लिये है. साथ ही शब्दों का चयन सही जगह भी कर पा रहे है.

    मगर सबसे खूबसूरत बात ये है, कि तकनीकी नज़र से भी ये पूरी मुकम्मिल है. इसीलिये, ये पूरी तरह से गेय गज़ल है. इसिलिये आपसे गुज़ारिश है, कि आप तो किसी भी सूरत में इसको धुन में बांधे, और गाने के लिये तैयार रहे> बाकी बात रिकोर्डिंग की तो हम पर छोड दे.

    अगर मुझे समय होता तो मुझे इसको धुन में बांधने में खुशी होती.

    ReplyDelete
  2. "जख्म गहरा जो ना लिया यारों" बहुत अच्‍छे अर्श भाई। दुसरा शेर लजवाब था।

    ReplyDelete
  3. ग़ज़ल की क्या तकनीक होती है पता नही लेकिन जो पड़ने मे अच्छी लगती है लाइने वह मुझे ग़ज़ल लगती है . अर्श भाई लिखते रहो

    ReplyDelete
  4. हादसे और हो गए होते ,
    ख़ुद को पत्थर बना लिया यारों .

    अत्यन्त सुंदर एवं ह्रदय स्पर्शी .

    ReplyDelete
  5. क्या बात कही है. गुरुदेव का आशीष स्पष्ट है, बहुत बधाई.

    ReplyDelete
  6. बहुत बढ़िया है भाई. क्या बात है. वाह !

    ReplyDelete
  7. बहुत ही सुन्दर रचना, बधाई।

    ReplyDelete
  8. bahut sunder gazal arsh ji badhai. swapn

    ReplyDelete
  9. पत्थर बना लिया अब तो कोई फ़िक्र नहीं होनी चाहिए.लेकिन क्या पत्थर भी संवेदनशील बन सकते हैं. सुंदर ग़ज़ल. शुक्रिया.

    ReplyDelete
  10. अर्श भैय्या हम तो दीवाने हो गये....

    बस दिल से वाह-वाह निकलती जा रही है.

    बधाई एक सुंदर-बहुत सुंदर गज़ल के लिये-बहरो-काफ़िया पर कसी हुई गज़ल

    ReplyDelete
  11. क्या बात है अर्श। बहुत अच्छे।

    हादसे और हो गये होते
    ख़ुद को पत्थर बना लिया यारों

    वाह!

    ReplyDelete
  12. अर्श साहेब
    पहली बार ही आपकी साइट पर आया हूं। अब महसूस हुआ कि मैं भी किस किस्म का शख्स हूं जो आज तक इस महफ़िल से महरूम रहा। भई, मज़ा आगया। ग़ज़ल को ग़ज़ल की तरह पढ़ने का मौक़ा मिला। धीरे धीरे आपकी ग़ज़लें पढ़ता रहूंगा। उम्र के साथ आहिस्तगी ने भी अपने पर फैला दिये हैं। यह ज़रूर कहूंगा कि यहां आने पर
    ऐसा लगा कि वाक़ई ग़ज़ल से मुलाक़ात हुई है। बधाई।

    ReplyDelete
  13. एक कशिश सी है इस ग़ज़ल में, बहुत बढिया

    ReplyDelete
  14. एक भावनात्मक ग़ज़ल के के लिए बधाई,प्रकाश भाई
    अच्छा शेर है>>>
    हादसे और हो गए होते
    ख़ुद को पत्थर बना लिया यारो
    - विजय

    ReplyDelete
  15. ये बात है अर्श भाई बेहद खूबसूरत ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई।
    सुबीर जी से मैं ज़रूर बात करूंगा के हमारे अर्श को नज़र लगवाओगे इस कम्सिनी में ? हा हा शुभकामनाओं सहित।

    ReplyDelete
  16. ग़ज़ल धर्मिता में निखार स्वाभाविक है, पंकज बाबू आपको ग़ज़लसरा बना के ही दम लेंगे!

    ---
    भारत का गौरव तिंरगा आपके ब्लॉग पर ज़रूर लगायें, जाने कैसे?
    तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

    ReplyDelete
  17. अच्छी ग़ज़ल कही है भाई.. स्वीकारें अब खूब बधाई..
    kyonki
    जा पे कृपा सुबीर की होई.. वा की ग़ज़लें बेहतर होईं..

    ReplyDelete
  18. Arsh read ur 'shikayat" on my blog ha ha ha ah I am sorry if u felt like this.... may be i could not noticed your postings in time, please do keep writing , my good wishes are always with you"

    Regards

    ReplyDelete
  19. मैंने भी दिल लगा लिया यारों.... जख्म पे जख्म पा लिया यारों...."
    " एक भावनात्मक प्रस्तुती.... अर्श जी बहुत तरीके से दिल की बात का अंदाजे बयाँ है ....सच ही तो है जख्म का एहसास करना हो तो दिल का लगाना जरूरी है"
    Regards

    ReplyDelete
  20. हादसे और हो गए होते ,
    ख़ुद को पत्थर बना लिया यारों!
    बहुत उम्दा !
    क्या बात है!
    बहुत खूब लिखा है..

    -ग़ज़ल बहुत सरल होते हुए भी अपना पूरा असर छोड़ रहीहै.
    [आप अच्छा करते हो जो उर्दू शब्दों का अर्थ साथ में देते हो--कुछ नए शब्द सीख लेते हैं].

    ReplyDelete
  21. कोन कहता है नये जमाने मे अच्छे शायर नही ??
    अर्श भाई बहुत ही सुंदर, लजावाब, शॆर कहे आप ने
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  22. ARSH,AAJ KI LIKHI TAZI RACHNA ,TUMHARA MERE BLOG PAR AANA ZAROORI HAI, RACHNA KA SHIRSHAK HAI "ISHQ" PADHEN AUR ANAND LRN. SWAPN

    ReplyDelete
  23. bhai arsh ,

    acchi gazal padhne ke chahat poori hui , ise padhkar . bhai maza aa gaya , subah subah , dil khush ho gaya .. good , very good , bahut badhiya likha hai ... mukjhe saare sher ache lage ..lekin aakhri wala jabasdasht hai ..

    wah ji wah

    vijay

    ReplyDelete
  24. बड़ी ही दर्द भरी नज़्म लिखते हो ,
    अभी तो उम्र दराज़ नहीं और ज़ख्मको महसूस भी न किया हो शायद ,
    और आन्सुके मोतियों को क्यों जाया करते हो ???

    ReplyDelete
  25. आप तो गज़लों के बादशाह बनते जा रहें हैं. बहुत उम्दा ग़ज़ल है मेरे भाई. बधाई स्वीकार करें मेरा.

    ReplyDelete
  26. gazal smraat ko mera slaam kis kis gazal ki taareef karoon sabhi lajavaab hai

    ReplyDelete
  27. शानदार। मैं आपको पढूंगा।

    ReplyDelete
  28. आप सभी पाठकों का दिल से धन्यवाद करना चाहूँगा जो मेरे जैसे अदना के लिए समय निकला और मेरे ब्लॉग पे आए .. और मुझे पसंद किया ..सही कहूँ तो सारा श्रेय मेरे गुरु उस्ताद पंकज सुबीर जी को जाता है जो मुझे ग़ज़ल की बारिकिओं को सिखाते है ..निर्मला जी अभी तो मैं ग़ज़ल सिखने के क्रम में हूँ ग़ज़ल सम्राट कैसे हो सकता हूँ आपने मुझे प्रोत्साहित किया इसके लिए मैं आभारी हूँ .... आप सभी का हार्दिक अभीनंदन करता हूँ अपने ब्लॉग पे ....और यही उम्मीद करता हूँ के आप सभी का प्यार और स्नेह इसी तरह से क्रमशः बना रहे...

    आभार
    आपका
    अर्श

    ReplyDelete
  29. Arsh,
    main ne is ghazal ki dhun samjh li hai..thoda jukaam hai abhi..theek ho jaye phir record karungi :)--Dilip ji sangeet ke gyani hain.unhone sahi kaha..bahut hi pyari aur gayi ja sakne wali ghazal hai..bahut shukriya ki mujhey aap ne is layak samjha..jald hi is ki dhun batati hun.-alpana

    ReplyDelete
  30. हादसे और हो गए होते ।
    ख़ुद को पत्थर बना लिया यारों ॥

    सच बहुत सुंदर हर शेर
    बादशाह-ए-गजल

    ReplyDelete
  31. भाई के तो क्या कहने......
    बात ही कुछ और है कहीं दर्द मिलता है
    तो कहीं प्यार कहीं जख्म मिलता है तो कहीं हमदर्द
    बहुत ही अच्छा लिखा है भाई....
    जबरदस्त ग़ज़ल है....

    हम भी गुनगुनाना गाना चाहते हैं भाई इस ग़ज़ल को

    ReplyDelete
  32. थे हम जुदा एक अच्छी शायरी से ,
    शुक्र की हमने अर्श को पा लिया यारो

    ReplyDelete
  33. Wonderfull shayeri...........
    guru ji ke aashirvaad se painaa pan aata jaa rahaa hai

    ReplyDelete
  34. mast...bahut achha hai,padh kar kuch kho se gaye.itna acha jo likha hai aapne..eu hi likhte tahiye.samay mile to hamare blog par bhi visit kare.

    ReplyDelete
  35. नही दोस्त आज भी आखिरी शेर सबसे बेहतर लगा.......

    ReplyDelete
  36. bhai nai rachna ka intzar hai. swapn

    ReplyDelete
  37. अर्श जी क्या बात है काफी दिन बीत गए कुछ नया नही लिखा खैरियत तो है न भाई साहेब .शुभ कामनाएं

    ReplyDelete
  38. वाह अर्श भाई वाह बढिया ग़ज़ल, पिछले दिनों कुछ अस्वस्थ होने के कारण आपको पढ़ नहीँ पाया। आपकी ग़ज़ल पढ़्कर आनंद आया

    ReplyDelete
  39. kya baat h bhaiya... kya hua..???
    dus din ho gaye blog suna pada h..
    roz aa kar bina kuch padhe khali lautanaa pad rha h.... :(

    ReplyDelete
  40. अर्श जी


    आपको बहुत- बहुत बधाई.

    आपकी लेखनी में लगातार निखार आता जा रहा है

    बहुत खूब.

    ReplyDelete
  41. Gantantra Divas ki Hardik Shubh-kaamnayein...
    Jai Hind...!!!
    :)

    ReplyDelete
  42. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

    ReplyDelete
  43. are bhai patthar hi bane rahoge kya?

    ReplyDelete
  44. bhaiya....!! kya baat hai..???
    sab kuchh theek to hai na...??
    aaj fir se khali haath lautna pad raha hai...
    12 din ho gaye hain...
    matlab ki aapke blog par aane ke lag-bhag do minute roz ke toh 12*2=24 min.
    teen comments ke 3+2+10=15 min.
    to kul milaakar 24+15=39 min. ka input
    or output = 000000.000000

    :((
    :((

    ReplyDelete
  45. क्या खूब लिखा है आपने वाह!

    ReplyDelete
  46. arsh ji if everything is alright na,plz tell

    ReplyDelete
  47. अच्छी रचना के जिये साधुवाद स्वीकारें.

    ReplyDelete
  48. काफी अच्छी लिखी है .. अच्छी अभिव्यक्ति..

    ReplyDelete
  49. मैंने भी दिल लगा लिया यारो
    ज़ख्म पे ज़ख्म प् लिया यारो

    वाह वाह अर्श जी ....! बहुत अच्छे... !

    ReplyDelete
  50. Bhai Prakash 'Arsh'ji namaskar,
    Aaj pahali bar aapka blog dekha aur ghazalen padin. Aap bahut sunder ghazalen likhate hain.
    meri badhai sweekaren.Aap isi tarah achchhi achchhi ghazalen likhate rahen ye meri shubh kaamanaayen hain.

    ReplyDelete
  51. ati sundar...


    _______________
    http://merastitva.blogspot.com

    ReplyDelete
  52. हादसे और हो गए होते ।
    ख़ुद को पत्थर बना लिया यारों ॥

    तूने जो दिल लगा लिया यारोँ
    क्या था तू क्या बना लिया यारोँ ॥

    ReplyDelete

आपका प्रोत्साहन प्रेरणास्त्रोत की तरह है,और ये रचना पसंद आई तो खूब बिलेलान होकर दाद दें...... धन्यवाद ...